उत्तर प्रदेश में जमीन का नामांतरण (Mutation), जिसे आम भाषा में दाखिल-खारिज या वरासत भी कहा जाता है, अब पूरी तरह ऑनलाइन हो गया है। यदि परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उनकी जमीन वारिसों के नाम दर्ज करानी है, तो आपको कहीं भटकने की जरूरत नहीं है।
पहले वरासत कराने के लिए लोगों को तहसील के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब यूपी सरकार ने यह प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है।अगर सही प्रक्रिया पता हो, तो आप घर बैठे खुद आवेदन कर सकते हैं और किसी एजेंट की जरूरत नहीं पड़ती।
⚠️ ध्यान दें: वरासत केवल तब की जाती है जब जमीन मालिक की मृत्यु हो जाती है। यदि जमीन खरीद-बिक्री हुई है, तो उसके लिए सामान्य नामांतरण प्रक्रिया अलग होती है।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| प्रक्रिया का नाम | उत्तराधिकार/वरासत (Inheritance) |
| आधिकारिक वेबसाइट | vaad.up.nic.in |
| जरूरी दस्तावेज | मृत्यु प्रमाण पत्र, खतौनी, परिवार रजिस्टर नकल |
| समय सीमा | 35 से 45 दिन (अविवादित मामलों में) |
| सरकारी फीस | बिल्कुल मुफ्त (₹0) |
| निस्तारण अधिकारी | लेखपाल और राजस्व निरीक्षक (R.I.) |
नामांतरण या वरासत क्या है?
जब किसी जमीन के मालिक की मृत्यु हो जाती है, तो उनके कानूनी उत्तराधिकारियों (जैसे बेटा, बेटी या पत्नी) का नाम सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) में दर्ज करने की प्रक्रिया को वरासत कहते हैं। जमीन पर कानूनी अधिकार बनाए रखने के लिए वरासत कराना बहुत जरूरी माना जाता है।
जमीन के मालिकाना हक को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को नामांतरण (Mutation) या दाखिल-खारिज कहा जाता है। जब यही प्रक्रिया किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के लिए की जाती है, तो इसे वरासत कहा जाता है।
वरासत आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन शुरू करने से पहले नीचे दिए गए सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, ताकि फॉर्म भरते समय कोई परेशानी न हो।
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)। यह एक बहुत जरूरी दस्तावेज है।
- मृतक का आधार कार्ड (यदि उपलब्ध हो)।
- वारिसों के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर।
- जमीन की खतौनी (खाता संख्या और गाटा संख्या)। यदि आपके पास यह जानकारी नहीं है, तो आप पहले नाम से जमीन कैसे देखें वाली गाइड पढ़ सकते हैं।
- गवाहों तथा वारिस के नाम और पते।
परिवार रजिस्टर की नकल (Family Register Copy) वरासत के लिए जरूरी दस्तावेजों में से एक है। कई मामलों में लेखपाल रिपोर्ट से पहले इसे जमा करने के लिए कहा जाता है।
UP वरासत ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step)
उत्तर प्रदेश में वरासत के लिए आपको राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रणाली (RCCMS) के पोर्टल का उपयोग करना होता है। वरासत आवेदन करने के लिए नीचे बताए गए सभी स्टेप्स ध्यान से फॉलो करें।
अगर आप पूरा LIVE तरीका देखना चाहते हैं, तो नीचे वीडियो देखें 👇
Step 1: सबसे पहले उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट vaad.up.nic.in खोलें।
Step 2: होमपेज को नीचे की ओर स्क्रॉल करें। यहाँ आपको उत्तराधिकार/वरासत के लिए ऑनलाइन आवेदन का लिंक दिखाई देगा। यह लिंक ऑनलाइन आवेदन सेक्शन में मिलेगा, इस पर क्लिक करें।

Step 3: अब एक नया पेज खुलकर आएगा। यहाँ आप अपना एक्टिव मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी भेजें पर क्लिक करें।

Step 4: अपने मोबाइल नंबर पर आए OTP को भरें फिर स्क्रीन पर दिख रहे कैप्चा को भरकर Login पर क्लिक करें।

Step 5: अब आपके सामने आवेदन फॉर्म का पहला भाग खुलकर आ जाएगा। पूरा फॉर्म 4 हिस्सों में बंटा हुआ है। पहले भाग में आवेदक (जो वारिसों की तरफ से फॉर्म भर रहा है) की जानकारी भरें।
- आवेदक का नाम
- लिंग
- मोबाइल नंबर
- पता
- पिता /माता /पति /संरक्षक का नाम
जानकारी भरने के बाद “सुरक्षित करें और आगे बढ़ें” पर क्लिक करें।

फॉर्म में भरी गई सभी जानकारी हिंदी में ही भरें वरना आपका आवेदन रिजेक्ट हो जाएगा।
Step 6: अब फॉर्म के दूसरे भाग में मृतक का विवरण भरें यानी की यहाँ उस व्यक्ति की जानकारी भरें जिसके नाम पर वर्तमान में जमीन दर्ज है। यहाँ खातेदार का नाम, खातेदार के साथ रिश्ता, उसका पता, नामांतरण की वजह और मृतक से संबंधित मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें, और “सुरक्षित करें और आगे बढ़ें” पर क्लिक करें।

अगर फॉर्म भरने में कोई गलती हो जाये तो आप नीचे दिख रहे रिसेट करें पर क्लिक करें।
Step 7: अब आपके सामने फॉर्म का तीसरा भाग खुलकर आएगा यहाँ आप जमीन के लोकेशन की जानकारी भरें फिर गाटा नंबर और खतौनी खाता की जानकारी चुनकर जोड़ें के ऑप्शन पर क्लिक करके सुरक्षित करें और आगे बढ़ें पर क्लिक करें।
यदि आपको गाटा संख्या याद नहीं है, तो पहले नाम से जमीन कैसे देखें या खसरा नंबर से जमीन कैसे देखें वाली पोस्ट पढ़ें।

Step 8: फॉर्म के चौथे भाग में वारिस की जानकारी जैसे की वारिस का नाम, उम्र, घर का पता, खातेदार से सम्बन्ध इत्यादि सभी जानकारी भरकर वारिस जोड़ें के ऑप्शन पर क्लिक करें और उन सभी लोगों के नाम एक-एक करके भरें जो मृतक के कानूनी वारिस हैं। नाम जोड़ने के बाद भरा गया आवेदन देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 9: आपके सामने भरा हुआ पूरा फॉर्म खुलकर आ जाएगा उसे सही से चेक करके चेक बॉक्स को टिक करें और सुरक्षित करें के ऑप्शन पर क्लिक कर दें।

अगर फॉर्म में कुछ गलती है तो संशोधित करें वाले ऑप्शन पर क्लिक करके फॉर्म में सुधार कर सकते है।
Step 10: सुरक्षित करें पर क्लिक करते ही आपका फॉर्म सबमिट हो जायेगा और आपको आपका आवेदन संख्या मिल जाएगी, इसे सुरक्षित रखें।

यदि आप ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं, तो आप तहसील में ‘लेखपाल’ को सीधे आवेदन (Form-9) भी दे सकते हैं।
Step 11: अब आवेदन रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज हो जायेगा आप आवेदन देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करके अपने आवेदन को डाउनलोड करके सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सके।

Step 12: आवेदन की स्थिति (Status) कैसे ट्रैक करें?
ऑनलाइन आवेदन करने के बाद, आप घर बैठे यह पता लगा सकते हैं कि आपकी वरासत की फाइल अभी किस अधिकारी (लेखपाल या आर.आई.) के पास है। यानि की आप ऑनलाइन आवेदन की स्थिति (Status) देख सकते हैं।
Step 1: पोर्टल पर जाएँ: सबसे पहले आप वापस vaad.up.nic.in वेबसाइट खोलें।
Step 2: विकल्प चुनें: होमपेज को स्क्रॉल करके दिए गए ‘वाद खोजें (Search Cases)’ सेक्शन में जाएँ। अब वरासत हेतु आवेदन की स्थिति जाने वाले ऑप्शन पर क्लिक करे।

Step 3: विवरण भरें: अब अपना ‘ऑनलाइन आवेदन संख्या’ जो आपके आवेदन फॉर्म के सबमिट होने के बाद मिली थी उसे भरे और आवेदन खोजे वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 4: स्थिति देखें: आपके सामने स्क्रीन पर आपके आवेदन की जानकारी और आवेदन की स्थिति (Status) देखने को मिल जाएगी। पूरी जानकारी के लिए आप विवरण देखे वाले ऑप्शन पर क्लिक करे दें।

Step 5: आपके सामने आवेदन की पूरी रिपोर्ट खुलकर आ जाएगी। अगर स्टेटस ‘Pending at Lekhpal’ दिख रहा है, तो इसका मतलब जांच जारी है।

प्रो-टिप्स (Expert Suggestions):
डिजिटल सिग्नेचर वाली खतौनी: जैसे ही स्टेटस “स्वीकृत (Approved)” दिखाए, यूजर को तुरंत नई खतौनी (Bhulekh) चेक करनी चाहिए। उन्हें बताएं कि वरासत मंजूर होने के बाद खतौनी में ‘कॉलम नंबर 9’ में वारिसों के नाम का आदेश चढ़ जाता है।
कंप्यूटरीकृत वाद संख्या (Computerized Case No.): यूजर को बताएं कि आवेदन के कुछ दिनों बाद उन्हें एक ‘कंप्यूटरीकृत वाद संख्या’ भी मिलती है। भविष्य में तहसील या कोर्ट में पैरवी के लिए यही नंबर सबसे ज्यादा काम आता है।
लेखपाल का नाम और नंबर: स्टेटस रिपोर्ट में अक्सर संबंधित लेखपाल का नाम दिखाई देता है। यदि आवेदन 15 दिनों से ज्यादा पेंडिंग है, तो यूजर को उस रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट लेकर लेखपाल से संपर्क करे।
नया नाम चढ़ने के बाद आप अपना [UP Bhulekh] यहाँ से चेक कर सकते हैं।
आवेदन फॉर्म वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद आपके फॉर्म का वेरिफिकेशन किया जाता है। वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया नीचे बताई गई है।
- लेखपाल की जांच: आपका आवेदन डिजिटल रूप से क्षेत्र के लेखपाल के पास जाता है। ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद आगे की पूरी प्रक्रिया राजस्व विभाग द्वारा की जाती है। लेखपाल आपके गांव आकर जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट आगे बढ़ाएगा। इस दौरान आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है।
- राजस्व निरीक्षक (R.I.) की रिपोर्ट: लेखपाल जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट राजस्व निरीक्षक को भेजता है। यदि वरासत अविवादित है (यानी किसी ने आपत्ति नहीं की है), तो R.I अपनी संतुष्टि के बाद नामांतरण आदेश जारी कर देता है।
- समय सीमा: उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार, अविवादित (बिना किसी विवाद के) वरासत की यह प्रक्रिया 35 से 45 दिनों के भीतर पूरी हो जाती है। अगर इतने दिनों में आपके जमीन की वरासत प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो आप शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
- खतौनी में अंकन: आदेश पारित होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम में खुद ही खतौनी में से मृतक का नाम हटाकर वारिसों का नाम चढ़ा दिया जाता है।
- मोबाइल नंबर चालू रखें: वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया सरकारी लोगों द्वारा की जाती है एवं इसके लिए कोई पैसे नहीं लगते। आपके पास पूछताछ के लिए फ़ोन किया जा सकता है इसीलिए आवेदन फॉर्म में दिया गया अपना मोबाइल नंबर चालू रखें।
नोट: यदि वरासत विवादित (Contested) है, तो इसमें अधिक समय लग सकता है और मामला तहसीलदार कोर्ट में जाएगा।
💡 BhumiGyan Expert Tip (नेहा यादव): ऑनलाइन वरासत आवेदन के बाद अपने क्षेत्र के लेखपाल से एक बार संपर्क ज़रूर कर लें। हालांकि प्रक्रिया ऑनलाइन है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से मिलने से काम में तेज़ी आती है और कोई छोटी-मोटी कमी हो तो तुरंत पता चल जाती है।
Disclaimer: यह जानकारी पोर्टल के वर्तमान नियमों पर आधारित है, सरकारी नियमों में बदलाव संभव है।
वरासत आवेदन रिजेक्ट क्यों हो सकता है?
आवेदन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपका फॉर्म खारिज न हो:
- गलत जानकारी भरने पर
- दस्तावेज mismatch होने पर
- गलत गाटा/खाता संख्या देने पर
- वारिस विवाद होने पर
अगर वरासत विवादित हो जाए तो क्या करें?
कभी-कभी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है और वरासत प्रक्रिया में बाधाएँ आ जाती हैं, जैसे:
- अगर मृतक की कोई गुप्त वसीयत सामने आ जाए।
- कोई अन्य व्यक्ति स्वयं को असली वारिस बताकर आपत्ति (Objection) दर्ज कर दे।
- या फिर परिवार के सदस्यों के बीच हिस्सेदारी को लेकर झगड़ा हो।
ऐसी स्थिति में मामला अविवादित श्रेणी से निकलकर विवादित में चला जाता है। अब इसकी सुनवाई तहसीलदार न्यायालय में होती है। दोनों पक्षों को अपने सबूत और गवाह पेश करने होते हैं, जिसके बाद तहसीलदार अंतिम फैसला सुनाता है। इसके बाद ही वरासत की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
उत्तर प्रदेश में वरासत (उत्तराधिकार) के प्रकार
उत्तर प्रदेश में वरासत अलग-अलग प्रकार की होती है। आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका मामला किस प्रकार में आता है:
- सामान्य वरासत (मृत्यु के बाद)/ Succession: यह सबसे आम स्थिति होती है। जब जमीन मालिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी जमीन पत्नी, बेटे या बेटी जैसे कानूनी वारिसों के नाम पर चढ़ाई जाती है।
- वसीयत के आधार पर वरासत/ Based on Will: अगर मृतक ने अपनी जमीन किसी के नाम वसीयत (Will) कर दी है, तो उसी के आधार पर नामांतरण किया जाता है। ऐसे मामलों में कई बार तहसील में जांच भी होती है।
- अविवादित वरासत (बिना झगड़े वाली)/ Uncontested: जब परिवार में किसी तरह का विवाद नहीं होता और सभी वारिस सहमत होते हैं। ऐसे मामलों में ऑनलाइन आवेदन आसानी से हो जाता है।
- विवादित वरासत (झगड़े वाली)/ Contested: अगर जमीन को लेकर परिवार में विवाद हो या कोई आपत्ति कर दे, तो मामला तहसीलदार के पास जाता है और फैसला कोर्ट में होता है।
वरासत कराना क्यों जरुरी है?
- मालिकाना हक की पुष्टि: रजिस्ट्री केवल एक दस्तावेज है, लेकिन नामांतरण यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की नजर में अब आप उस जमीन के आधिकारिक मालिक हैं। यह आपके मालिकाना हक़ की पुष्टि करता है।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी केवल उन्हीं को मिलती है जिनका नाम खतौनी में दर्ज हो।
- ऋण सुविधा (KCC): यदि आप अपनी जमीन पर बैंक से कृषि ऋण या किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाना चाहते हैं, तो बैंक आपसे अद्यतन खतौनी (नामांतरण के बाद वाली) मांगता है। खतौनी के बिना आपको आपके जमीन पर लोन नहीं मिलता है।
- जमीन का पुनर्विक्रय: भविष्य में यदि आप उस जमीन को बेचना चाहते हैं या परिवार के बीच बंटवारा करना चाहते हैं, तो वरासत के बिना यह संभव नहीं होगा। इसके लिए वरासत कराना बहुत जरूरी हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ऑनलाइन वरासत कराने के लिए कितने पैसे देने होते हैं?
उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन वरासत आवेदन पूरी तरह से निशुल्क है। इसके लिए कोई पैसे नहीं लगते।
क्या विवाहित बेटी का नाम वरासत में आ सकता है?
हाँ, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अनुसार, बेटियाँ (चाहे विवाहित हों या अविवाहित) अपने पिता की संपत्ति में बराबर की कानूनी वारिस होती हैं।
अगर लेखपाल रिपोर्ट नहीं लगा रहा है तो क्या करें?
यदि 45 दिन से अधिक समय बीत गया है, तो आप ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076’ पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
क्या वसीयत के आधार पर भी ऑनलाइन वरासत हो सकती है?
वसीयत के आधार पर नामांतरण थोड़ा मुश्किल होता है और अक्सर इसे ‘विवादित’ श्रेणी में रखा जाता है। इसके लिए आपको वकील की सलाह लेनी चाहिए।
ऑनलाइन वरासत के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, खतौनी और परिवार रजिस्टर की नकल जरूरी होती है।
क्या वरासत के लिए सभी वारिसों की सहमति जरूरी होती है?
सामान्यतः सभी कानूनी वारिसों की जानकारी देना आवश्यक होता है।
क्या बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के वरासत हो सकती है?
अधिकांश मामलों में नहीं, मृत्यु प्रमाण पत्र आवश्यक होता है।
वरासत कितने दिन में पूरी होती है?
उत्तर प्रदेश में अविवादित (बिना किसी विवाद के) वरासत प्रक्रिया आमतौर पर 35 से 45 दिनों के भीतर पूरी हो जाती है। हालांकि, यदि आवेदन में कोई गलती हो या किसी प्रकार का विवाद हो जाए, तो इसमें अधिक समय लग सकता है।
क्या बिना आधार कार्ड के वरासत हो सकती है?
हाँ, कुछ मामलों में बिना आधार कार्ड के भी वरासत आवेदन किया जा सकता है, लेकिन पहचान प्रमाण के लिए आधार कार्ड देना सबसे आसान और स्वीकार्य तरीका माना जाता है। यदि आधार उपलब्ध न हो, तो अन्य वैध पहचान दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है।
निष्कर्ष
जमीन का नामांतरण या वरासत समय पर कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में मालिकाना हक को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन वरासत की प्रक्रिया ने भ्रष्टाचार और देरी को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। जैसे ही परिवार में किसी भूमि स्वामी का निधन हो, बिना देरी किए वरासत के लिए आवेदन करें। समय पर वरासत कराने से भविष्य में कानूनी विवाद की संभावना कम होती है और रिकॉर्ड सही बना रहता है।

नेहा यादव एक इंजीनियर हैं, जो जमीन (Land Records) से जुड़े कागजात और सरकारी डेटा को सरल भाषा में समझाने का काम करती हैं। अपनी तकनीकी समझ की मदद से वे जटिल जानकारी को आसान बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
Bhumi Gyan के माध्यम से उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के लोगों की मदद करना है, ताकि वे घर बैठे अपने खसरा, खतौनी और भूलेख के रिकॉर्ड खुद और बिना किसी गलती के देख सकें।