उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े मामलों में ‘बैनामा’ या ‘रजिस्ट्री’ सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। यह साबित करता है कि जमीन किसके नाम पर खरीदी गई है। पहले लोगों को अपनी पुरानी रजिस्ट्री देखने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे और रिकॉर्ड ढूंढने में काफी समय लग जाता था।
लेकिन अब IGRSUP पोर्टल की मदद से आप घर बैठे मोबाइल से ही किसी भी जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन देख सकते हैं। इस लेख में हम आपको रजिस्ट्री देखने का सबसे आसान तरीका स्टेप-बाय-स्टेप समझाएंगे।
👉 UP में रजिस्ट्री ऑनलाइन कैसे देखें (Quick Answer): आप IGRSUP की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘सम्पत्ति खोजें’ विकल्प चुनें। इसके बाद जनपद, तहसील, वर्ष और क्रेता (Buyer) या विक्रेता (Seller) का नाम भरकर आसानी से जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन देख सकते हैं।
UP Registry Online कैसे देखें? (Step-by-Step आसान तरीका)
यहाँ हम सबसे आसान तरीका यानी ‘क्रेता के नाम से खोजने ‘ की प्रक्रिया बता रहे हैं इससे आप आसानी से UP Registry Online देख सकते हैं।
Step 1: सबसे पहले राज्य सरकार की ऑफिसियल वेबसाइट igrsup.gov.in पर जाएं। ध्यान रखें, हमेशा सिर्फ UP की आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें, ताकि कोई गलत जानकारी न मिले।
Step 2: अब आपके सामने कई ऑप्शन खुलेंगे। इनमें से आप बाएं तरफ दिख रहे सम्पति खोजें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 3: अगर आप पहली बार वेबसाइट पर आये है तो निचे दिख रहे यहाँ रजिस्टर करें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। यह UP Registry Online देखने के लिए एक जरूरी स्टेप है।

Step 4: आपके सामने रजिस्ट्रेशन करने के लिए एक फॉर्म खुलकर आएगा उस फॉर्म को सही तरीके से भरकर ‘प्रवेश करें’ वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। आपको आपका User Id और पासवर्ड मिल जायेगा।

Step 5: अब अपनी User Id और पासवर्ड को भरें फिर कैप्चा को भरकर प्रवेश करें के ऑप्शन पर क्लिक करें यह वेबसाइट में लॉगिन करने के लिए जरूरी है।

Step 6: अब आपके रजिस्टर मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, उसे सही तरीके से भरकर वेबसाइट में लॉगिन कर लें।

Step 7: स्क्रीन पर आपको कई ऑप्शन देखने को मिलेंगे उसमे से आप क्रेता के नाम से वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। इससे आप जमीन के मालिक के नाम से UP Registry Online देख सकते हैं।
नोट: अगर आपके पास क्रेता (Buyer) का नाम नहीं है, तो घबराएं नहीं। आप इसी जगह पर ‘विक्रेता के नाम से’ या ‘पंजीकरण संख्या से’ वाला विकल्प भी चुन सकते हैं। आगे की प्रक्रिया (जनपद और तहसील चुनना) सभी के लिए एक जैसी ही रहेगी।

Step 8: अब स्क्रीन पर खुलकर आए पेज पर सबसे पहले अपने जनपद का नाम चुने फिर डिजिटल कीबोर्ड के मदद से क्रेता का नाम चुने इसके बाद तहसील, गांव, रजिस्ट्री का वर्ष और कैप्चा भरकर विवरण देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 9: अब आपके सामने जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी खुलकर आ जाएगी जहां आपको रजिस्ट्री की तारीख सहित अन्य जानकारी देखने को मिलेगी। पूरी जानकारी देखने के लिए पूर्ण विवरण देखें वाले सेक्शन में दिख रहे चयन करें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 10: आपके सामने जमीन की रजिस्ट्री से जुडी पूरी जानकारी खुलकर आ जाएगी यहाँ आपको जमीन का खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल आदि सभी महत्वपूर्ण जानकारी देखने को मिल जाएगी और आप आसानी से UP Registry Online देख सकते हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना: ऑनलाइन दिखाई गई रजिस्ट्री की जानकारी केवल संदर्भ (Reference) के लिए होती है। किसी भी कानूनी कार्य के लिए हमेशा रजिस्ट्री की प्रमाणित कॉपी (Certified Copy) ही मान्य होती है, जिसे आप रजिस्ट्रार कार्यालय या जन सेवा केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं।
UP Registry Online देखने के 4 तरीके
IGRSUP पोर्टल पर रजिस्ट्री खोजने के लिए सरकार ने 4 विकल्प दिए हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी तरीके का उपयोग कर सकते हैं:
1) क्रेता (Buyer) के नाम से खोजें
अगर आपको पता है कि जमीन किसने खरीदी थी, तो आप उनके नाम के शुरुआती अक्षर डालकर उस साल की सभी रजिस्ट्रियां देख सकते हैं। यह सबसे आसान तरीका है।
2) विक्रेता (Seller) के नाम से खोजें
कई बार धोखाधड़ी करने वाले लोग एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेच देते हैं। अगर आप बेचने वाले के नाम से सर्च करेंगे, तो आपको पता चल जाएगा कि उस व्यक्ति ने उस साल में और कितनी रजिस्ट्रियां की हैं और किन-किन लोगों को जमीन बेची है।
3) संपत्ति के पते से खोजें
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोगों को रजिस्ट्री नंबर याद नहीं होता। ऐसे में आप सिर्फ अपने जनपद, तहसील और गाँव का नाम चुनकर उस गाँव में हुई सभी रजिस्ट्रियों की लिस्ट देख सकते हैं।
4) पंजीकरण संख्या (Registry Number) से खोजें
अगर आपके पास रजिस्ट्री की फोटोकॉपी है और आप उसकी वैधता चेक करना चाहते हैं, तो सीधे पंजीकरण संख्या (जैसे- 1234/2024) डालकर विवरण निकाल सकते हैं। आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी।
UP Registry Online देखना क्यों जरुरी है?
UP Registry Online चेक करना जमीन से जुड़े हर काम के लिए बहुत जरूरी है।
- जमीन खरीदने से पहले: जब आप किसी से जमीन खरीदते हैं, तो बेचने वाला कहता है कि यह जमीन उसी की है। लेकिन कई बार लोग दूसरे की जमीन अपनी बताकर सौदा कर लेते हैं। ऑनलाइन चेक करने से आपको साफ-साफ दिख जाएगा कि जो आदमी जमीन बेच रहा है, क्या सरकारी कागजों में उसी का नाम है? इससे आप किसी भी फर्जीवाड़े से बच सकते हैं।
- दस्तावेज खो जाने पर: रजिस्ट्री का कागज बहुत कीमती होता है, लेकिन कई बार यह खो जाता है, चोरी हो जाता है या सालों-साल रखे रहने से खराब हो जाता है। अगर आपके पास रजिस्ट्री की नकल नहीं है, तो ऑनलाइन पोर्टल से आप उसका नंबर, तारीख और साल पता कर सकते हैं। इस जानकारी की मदद से आप तहसील जाकर अपनी रजिस्ट्री की दूसरी असली कॉपी (Certified Copy) निकलवा सकते हैं।
- धोखाधड़ी से बचने के लिए: आजकल धोखाधड़ी का एक नया तरीका है की एक ही खेत को दो अलग-अलग लोगों को बेच देना। जालसाज एक व्यक्ति से बयाना लेते हैं और फिर चुपके से किसी और की रजिस्ट्री कर देते हैं। UP Registry Online चेक करने से आपको यह पता चल जाएगा कि उस जमीन की हाल-फिलहाल में कोई दूसरी रजिस्ट्री तो नहीं हुई है।
- बैंक लोन के लिए: जब आप खेत पर लोन (जैसे KCC) या मकान बनाने के लिए पैसा लेते हैं, तो बैंक आपसे पुराने दस्तावेज मांगता है। यानी बैंक यह देखना चाहता है कि पिछले 15-20 सालों में यह जमीन किसके-किसके नाम रही है। ऑनलाइन पोर्टल पर आप पुराने से पुराना रिकॉर्ड देख सकते हैं। इससे बैंक को यह यकीन हो जाता है कि जमीन का मालिकाना हक सही है और आपका लोन बिना किसी रुकावट के पास हो जाता है।
रजिस्ट्री के विवरण (Index) को कैसे समझें?
जब आपके सामने रजिस्ट्री का विवरण खुलेगा, तो उसमें कुछ ऐसी जानकारी होगी जिन्हें समझना बहुत जरूरी है।
- पंजीकरण संख्या (Registration No.): यह उस रजिस्ट्री का यूनिक सरकारी नंबर होता है। जो हर जमीन के लिए अलग होता है। यह जमीन की पहचान होती हैं।
- विलेख का प्रकार (Type of Deed): यहाँ लिखा होगा कि यह ‘विक्रय पत्र’ (Sale Deed) है, ‘दान पत्र’ (Gift Deed) है या ‘वसीयत’ (Will)। इससे जमीन के प्रकार का पता लगता है।
- बाजार मूल्य (Market Value): सरकार के अनुसार उस जमीन की कीमत कितनी हैं यह भी रजिस्ट्री में लिखी होती हैं। अपनी जमीन का सही सरकारी रेट जानने के लिए यह लेख देखें: UP Circle Rate कैसे चेक करें?।
- प्रतिफल मूल्य (Consideration Value): वह कीमत जिस पर असल में सौदा हुआ है उसे प्रतिफल मूल्य कहते हैं।
- चौहद्दी (Boundaries): इसमें लिखा होता है कि जमीन के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में किसका खेत या मकान है। यह आपके जमीन की सही पहचान के लिए सबसे जरूरी है। अपनी जमीन की सही मेढ़ और नक्शा ऑनलाइन देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: UP Bhunaksha कैसे देखें?।
UP Registry Online चेक करते समय ये गलती न करें।
UP Registry Online चेक करते समय अक्सर लोग कुछ आम गलतियां कर देते हैं, जिसकी वजह से उन्हें रिकॉर्ड नहीं मिल पाता। यहाँ कुछ और जरूरी पॉइंट्स दिए गए हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए:
- नाम की स्पेलिंग में गलती: सरकारी रिकॉर्ड में नाम कई बार थोड़ा अलग तरीके से लिखा होता है (जैसे ‘राम कुमार’ की जगह सिर्फ ‘रामकुमार’)। अगर पूरा नाम डालने पर रिकॉर्ड न मिले, तो नाम के केवल शुरुआती 3-4 अक्षर ही डालकर सर्च करें।
- रजिस्ट्री का गलत साल (Year): कई बार जमीन का सौदा साल के आखिर (दिसंबर) में होता है, लेकिन कागजों पर चढ़ते-चढ़ते नया साल लग जाता है। अगर आपको रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, तो अपने बताए गए साल से एक साल पहले और एक साल बाद का रिकॉर्ड भी जरूर चेक करें।
- गाँव का नाम चुनने में गलती: एक ही नाम के कई गाँव हो सकते हैं। गाँव चुनते समय उसका ‘परगना’ या ‘कोड’ जरूर देख लें ताकि आप सही गाँव की लिस्ट चेक कर रहे हों।
- क्रेता और विक्रेता में कंफ्यूजन: अक्सर लोग ‘क्रेता’ (खरीदने वाला) और ‘विक्रेता’ (बेचने वाला) वाले कॉलम में गलती कर देते हैं। सर्च करते समय ध्यान दें कि आप किसका नाम किस बॉक्स में भर रहे हैं।
- भाषा का चुनाव: कुछ पुराने रिकॉर्ड हिंदी में सर्च करने पर ही मिलते हैं। अगर इंग्लिश में नाम डालने पर जानकारी नहीं आ रही, तो एक बार हिंदी में नाम लिखकर कोशिश करें।
- इंटरनेट और कैप्चा की गलती: सरकारी वेबसाइट कई बार धीमी चलती है। अगर ‘Submit’ करने पर पेज न खुले, तो दोबारा रिफ्रेश करें और कैप्चा कोड (दिए गए नंबर या अक्षर) को बिना गलती के भरें।
- पुरानी रजिस्ट्री का अधूरा डेटा: बहुत पुरानी रजिस्ट्री (जैसे 50-60 साल पुरानी) कभी-कभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होती क्योंकि उनका पूर्ण कंप्यूटरीकरण नहीं हुआ होता। ऐसे में केवल ऑनलाइन के भरोसे न रहें, तहसील जाकर भी पता करें।
रजिस्ट्री और खतौनी में क्या अंतर है?
रजिस्ट्री और खतौनी दोनों ही जमीन के कागज हैं, लेकिन दोनों का मतलब एकदम अलग होता है। अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जिससे बाद में कानूनी दिक्कतें आती हैं।
- रजिस्ट्री (Sale Deed): यह वह कागज है जो साबित करता है कि आपने जमीन खरीदी है और पैसे दिए हैं। यह रजिस्ट्री ऑफिस से मिलता है और रजिस्ट्री एक बार होने के बाद स्थायी रहती है (जब तक जमीन फिर से न बेची जाए)।
- खतौनी (Record of Rights): यह वह कागज है जो साबित करता है कि सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम चढ़ चुका है। यह राजस्व विभाग (तहसील) से मिलता है। खतौनी समय-समय पर अपडेट होती रहती है। इसमें जमीन पर चल रहे केस, बैंक का कर्ज या किसी और का हिस्सा भी दर्ज होता है।
रजिस्ट्री देखने के बाद अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम चढ़ा है या नहीं, तो हमारी यह गाइड पढ़ें: नाम से जमीन कैसे देखें UP 2026।
रजिस्ट्री एक ‘सौदा’ है, जबकि खतौनी उस सौदे की ‘सरकारी मोहर’ है। जब तक रजिस्ट्री और खतौनी दोनों में आपका नाम न हो, तब तक जमीन का काम अधूरा माना जाता है।
रजिस्ट्री होने के बाद ‘नामांतरण’ (Mutation) क्यों है जरूरी?
बहुत से लोग समझते हैं कि रजिस्ट्री हो गई तो काम खत्म। लेकिन याद रखें, रजिस्ट्री केवल एक Sale Deed (सेल डीड) होती है। जब तक आप तहसील में जाकर ‘दाखिल-खारिज’ (Mutation) नहीं कराते, तब तक सरकारी खतौनी में आपका नाम नहीं चढ़ेगा। इसलिए रजिस्ट्री ऑनलाइन चेक करने के बाद हमेशा अपनी खतौनी भी जरूर चेक करें।
अगर आपने अभी तक नामांतरण नहीं कराया है, तो यह प्रक्रिया जरूर पूरी करें, तभी आपकी जमीन का रिकॉर्ड सरकारी तौर पर अपडेट होगा।
रजिस्ट्री देखने के बाद ‘भारमुक्त प्रमाण पत्र’ (Encumbrance) क्यों चेक करें?
सिर्फ रजिस्ट्री देख लेना काफी नहीं है। जमीन पूरी तरह सुरक्षित और विवाद-मुक्त है या नहीं, यह जानने के लिए ‘भारमुक्त प्रमाण पत्र’ (EC) चेक करना जरूरी है।
- बैंक लोन का पता: इससे पता चलता है कि जमीन पर कोई लोन तो नहीं चल रहा।
- कोर्ट केस: क्या जमीन किसी कानूनी विवाद या ‘स्टे’ (Stay Order) में फंसी है?
- सलाह: रजिस्ट्री का विवरण (Index) निकालने के बाद तहसील से पिछले 12 सालों का 12-साला (Form 22) जरूर निकलवाएं।
इसलिए जमीन खरीदने से पहले EC जरूर चेक करें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके।
💡 एक्सपर्ट सलाह: नेहा यादव: जमीन खरीदते समय केवल वर्तमान मालिक की रजिस्ट्री (Sale Deed) देखकर संतुष्ट न हों। IGRSUP पोर्टल पर जाकर हमेशा ‘पंजीकरण विलेख का इतिहास’ चेक करें। इसका मतलब है कि आपको यह देखना चाहिए कि पिछले 30 सालों में वह जमीन किन-किन लोगों के हाथों से होकर गुजरी है। अगर पिछले 3 दशकों की कड़ियां (Chain of Documents) सही मिलती हैं और जमीन पर कोई पुराना विवाद नहीं है, तभी सौदा करना सुरक्षित है। यह छोटा सा कदम आपको भविष्य की बड़ी कानूनी समस्याओं और धोखाधड़ी से बचा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
UP में जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन कैसे देखें?
उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री देखने के लिए आपको IGRSUP की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा, वहां जिला, वर्ष और रजिस्ट्री संख्या या नाम दर्ज करके आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्री देख सकते हैं।
क्या नाम से जमीन की रजिस्ट्री देख सकते हैं?
हाँ, अगर आपके पास रजिस्ट्री नंबर नहीं है तो आप खरीदार या विक्रेता के नाम से भी जमीन की रजिस्ट्री खोज सकते हैं, लेकिन सही परिणाम के लिए नाम सही दर्ज करना जरूरी है।
UP Registry Online चेक करने के लिए क्या-क्या जानकारी चाहिए?
जमीन की रजिस्ट्री चेक करने के लिए आपको जनपद (जिला), वर्ष, रजिस्ट्री संख्या या दस्तावेज संख्या और कभी-कभी नाम की जरूरत होती है।
क्या जमीन की रजिस्ट्री PDF डाउनलोड कर सकते हैं?
आप ऑनलाइन रजिस्ट्री की जानकारी देख सकते हैं, लेकिन प्रमाणित PDF कॉपी के लिए आपको रजिस्ट्री कार्यालय या जन सेवा केंद्र से संपर्क करना होगा।
निष्कर्ष
IGRSUP पोर्टल के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन देखने की सुविधा देकर लोगों का काम बहुत आसान कर दिया है। अब आप बिना किसी दलाल या अतिरिक्त खर्च के अपनी जमीन की जानकारी खुद चेक कर सकते हैं।
जमीन खरीदते समय हमेशा उसकी रजिस्ट्री और पिछले रिकॉर्ड जरूर जांचें। साथ ही, पंजीकरण संख्या और वर्ष नोट करके समय-समय पर रिकॉर्ड चेक करते रहें, ताकि किसी भी धोखाधड़ी से बचा जा सके।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे दूसरों के साथ भी शेयर करें, ताकि वे भी अपनी जमीन की सही जानकारी आसानी से चेक कर सकें।

नेहा यादव एक इंजीनियर हैं, जो जमीन (Land Records) से जुड़े कागजात और सरकारी डेटा को सरल भाषा में समझाने का काम करती हैं। अपनी तकनीकी समझ की मदद से वे जटिल जानकारी को आसान बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
Bhumi Gyan के माध्यम से उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के लोगों की मदद करना है, ताकि वे घर बैठे अपने खसरा, खतौनी और भूलेख के रिकॉर्ड खुद और बिना किसी गलती के देख सकें।