उत्तर प्रदेश में अब प्रमाणित खतौनी (Digitally Signed UP Bhulekh) डाउनलोड करने के लिए तहसील जाने की जरूरत नहीं है। UP Bhulekh पोर्टल की मदद से आप मात्र ₹15 का ऑनलाइन भुगतान करके अपने मोबाइल से QR Code और डिजिटल हस्ताक्षर वाली प्रमाणित खतौनी डाउनलोड कर सकते हैं।
यह वही खतौनी होती है, जिसका उपयोग बैंक लोन, KCC, जमीन की रजिस्ट्री, कोर्ट केस और अन्य सरकारी कार्यों में किया जाता है।
इस आर्टिकल में हम आपको प्रमाणित खतौनी डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में बताएंगे। साथ ही सामान्य और प्रमाणित खतौनी में अंतर, फीस, उपयोग और जरूरी बातों की जानकारी भी देंगे।
मोबाइल से Digitally Signed UP Bhulekh कैसे डाउनलोड करें?
Step 1: सबसे पहले अपने फोन में UP Bhulekh की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट upbhulekh.gov.in के होमपेज खोलें। ध्यान रहे केवल ऑफिसियल वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
Step 2: होमपेज को नीचे की तरफ स्क्रॉल करें। यहाँ आपको अलग-अलग विकल्प दिखाई देंगे आप “ऑनलाइन पेमेंट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें” वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 3: अब अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर डालें और “Send OTP” पर क्लिक करें। आपके नंबर पर 6 अंकों का OTP आएगा, उसे बॉक्स में भरें और स्क्रीन पर दिख रहे कैप्चा कोड को डालकर Login पर क्लिक करें।

ध्यान रखें कि आप 24 घंटे की अवधि में केवल तीन बार OTP प्राप्त कर सकते हैं।
Step 4: अब नए पेज पर सबसे पहले अपना जनपद, तहसील, गांव फिर वर्तमान खतौनी को चुने। फिर नीचे खतौनी देखने के अलग-अलग तरीके दिखेंगे इसमें से खातेदार के नाम द्वारा वाले ऑप्शन पर क्लिक करके डिजिटल कीबोर्ड की मदद से जमीन के मालिक का नाम डालकर खोजें पर क्लिक करके सही नाम चुनकर उद्धरण देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Note: आप खसरा संख्या, खाता संख्या, खातेदार के नाम या नामांतरण तिथि जैसे किसी भी विकल्प से खतौनी खोज सकते हैं। इस गाइड में हमने उदाहरण के लिए खातेदार के नाम वाला तरीका बताया है।
📺 स्क्रीनशॉट देखकर प्रक्रिया समझने में परेशानी हो रही है? नीचे दिए गए वीडियो में QR Code और Digital Signature वाली UP प्रमाणित खतौनी डाउनलोड करने का पूरा तरीका विस्तार से दिखाया गया है।
Step 5: अब स्क्रीन पर आपकी जमीन का विवरण दिखेगा, जो कि अप्रमाणित कॉपी है। Digitally Signed UP Bhulekh डाउनलोड करने के लिए ऊपर दिए गए ऑनलाइन पेमेंट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 6: अब आपके सामने पेमेंट करने के अलग-अलग तरीके खुलकर आएंगे आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी एक तरीके को चुन ले यहां यूपीआई का तरीका सबसे आसान होगा।

Step 7: यूपीआई का तरीका चुनने के बाद आपके सामने पेमेंट का क्यूआर कोड खुल कर आएगा जिसे आप स्कैन करके खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए 15 रूपए का डायरेक्ट पेमेंट करें।

Step 8: पेमेंट सफल होते ही पेज को बैक या रिफ्रेश न करें। स्क्रीन पर “Transaction Successful” का मैसेज आएगा और नीचे “उद्धरण खतौनी निकालें” का ऑप्शन दिखेगा उसपर क्लिक करें।

Step 9: अब आपके सामने आपकी जमीन के खतौनी की प्रमाणित प्रति खुलकर चली आएगी। जिसका उपयोग आप किसी भी कानूनी कार्यों में आसानी से कर पाएंगे। यहां आपको क्यूआर कोड भी दिखेगा जो इसके असली होने का साक्ष्य होगा। अगर आप इसे पीडीऍफ़ के रूप में डाउनलोड करना चाहते हैं तो ऊपर दिख रहे डाउनलोड पीडीएफ के ऑप्शन पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।

प्रमाणित (Certified) और अप्रमाणित खतौनी में मुख्य अंतर
बहुत से लोग इंटरनेट से फ्री में मिलने वाली खतौनी डाउनलोड कर लेते हैं और बाद में वह बैंक या कोर्ट में रिजेक्ट हो जाती है। इन दोनों में अंतर समझना बेहद जरूरी है:
| विशेषताएं | सामान्य खतौनी (Free Copy) | प्रमाणित खतौनी (Certified Copy) |
| सरकारी फीस | यह पूरी तरह से मुफ्त (Free) होती है। | इसके लिए सरकार को ₹15 का ऑनलाइन शुल्क देना होता है। |
| Digitally Signed | इसमें कोई डिजिटल हस्ताक्षर या मुहर नहीं होती। | यह राजस्व अधिकारियों द्वारा Digitally Signed होती है। |
| सुरक्षा | इसमें सुरक्षा के लिए कोई QR कोड नहीं होता। | इसमें एक यूनिक QR Code और उद्धरण क्रमांक होता है। |
| कानूनी मान्यता | यह केवल जानकारी देखने के लिए होती है, कानूनी रूप से मान्य नहीं। | यह बैंक, कोर्ट और सभी सरकारी कामों में 100% मान्य होती है। |
| तहसील की मुहर | इसके लिए पहले तहसील जाकर मुहर लगवानी पड़ती थी। | डिजिटल हस्ताक्षर होने के कारण इसमें किसी मुहर की आवश्यकता नहीं होती। |
Digitally Signed UP Bhulekh की जरूरत कब पड़ती है?
इंटरनेट से निकाली गई फ्री या अप्रमाणित खतौनी केवल आपकी निजी जानकारी (जैसे गाटा संख्या या नाम चेक करने) के लिए होती है। लेकिन जब बात किसी कानूनी, वित्तीय या सरकारी प्रक्रिया की आती है, तो वहाँ केवल डिजिटल हस्ताक्षर और QR कोड वाली प्रमाणित खतौनी ही स्वीकार की जाती है। आइए जानते हैं कि इसकी जरूरत मुख्य रूप से कहाँ और क्यों पड़ती है:
1. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और बैंक लोन लेने में:
जब कोई किसान या भूमि स्वामी बैंक से किसी भी प्रकार का लोन (जैसे फसलों के लिए KCC लोन, ट्रैक्टर लोन, या जमीन पर मॉर्टगेज लोन) लेने जाता है, तो बैंक सबसे पहले जमीन के मालिकाना हक और उस पर पहले से कोई कर्ज (बंधक) तो नहीं है, इसकी जांच करता है। बैंक के सलाहकार केवल Digitally Signed प्रमाणित खतौनी के आधार पर ही जमीन की ‘सर्च रिपोर्ट’ तैयार करते हैं और लोन पास करते हैं।
2. जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री (Property Registration & Mutation) के लिए:
यदि आप अपनी जमीन किसी को बेच रहे हैं या किसी अन्य व्यक्ति से कोई प्लॉट या कृषि भूमि खरीद रहे हैं, तो सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (निबंधन कार्यालय) में रजिस्ट्री के समय प्रमाणित खतौनी की मुख्य भूमिका होती है। रजिस्ट्री के दौरान यह सुनिश्चित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है, वही सरकारी रिकॉर्ड में उसका असली मालिक है। इसके अलावा, रजिस्ट्री के बाद जब जमीन का दाखिल- खारिज (Mutation) होता है, तब भी राजस्व अधिकारियों द्वारा इसी प्रमाणित प्रति को आधार बनाया जाता है।
अगर आप जमीन खरीदने से पहले रजिस्ट्री रिकॉर्ड भी चेक करना चाहते हैं, तो UP बैनामा (Registry) ऑनलाइन कैसे देखें गाइड भी देख सकते हैं।
3. न्यायालयीन मामले और कानूनी विवाद में:
यदि आपकी जमीन को लेकर कोई पारिवारिक विवाद है, अवैध कब्जे की समस्या है, या सीमांकन (मेढ़ की पैमाइश) को लेकर कोई केस एसडीएम (SDM), तहसीलदार या दीवानी कोर्ट (Civil Court) में चल रहा है, तो वहाँ साक्ष्य के रूप में प्रमाणित प्रति ही मान्य होती है। बिना डिजिटल साइन या मुहर वाली खतौनी को कोर्ट सबूत नहीं मानता।
4. सरकारी योजनाओं का लाभ और वेरिफिकेशन के लिए:
केंद्र और राज्य सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो सीधे तौर पर किसानों की भूमि से जुड़ी हैं, जैसे पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), या फिर सरकारी केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान/गेहूं बेचने के लिए किसान पंजीकरण। आजकल इन सभी योजनाओं में कागजी धांधली रोकने के लिए ‘लैंड सीडिंग’ (Land Seeding) अनिवार्य कर दी गई है। जब तक आप प्रमाणित खतौनी के जरिए अपनी भूमि का वेरिफिकेशन नहीं करवाते, तब तक सरकारी सब्सिडी या फसल नुकसान का मुआवजा सीधे आपके बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफर नहीं किया जाता।
5. अन्य जरूरी कामों के लिए:
- जमानत (Bail) के लिए: कोर्ट में किसी व्यक्ति की जमानत लेते समय हैसियत प्रमाण पत्र या जमीन की प्रमाणित प्रति लगानी पड़ती है।
- मुआवजा (Compensation) प्राप्त करने के लिए: यदि आपकी जमीन किसी हाईवे, रेलवे ट्रैक या सरकारी प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित (Acquire) की जा रही है, तो सरकार से मुआवजा लेने के लिए प्रमाणित खतौनी जमा करनी होती है।
- भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत के लिए: यदि आपकी जमीन पर किसी ने कब्जा कर लिया है और आप तहसील, SDM या पुलिस में शिकायत करना चाहते हैं, तो प्रमाणित खतौनी जमीन के स्वामित्व का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है।
डिजिटल साइन खतौनी निकालने की फीस और समय
यूपी भूलेख पोर्टल या ई-डिस्ट्रिक्ट (e-District) के माध्यम से प्रमाणित (Digitally Signed) खतौनी निकालने के लिए सरकार द्वारा एक नाममात्र का शुल्क तय किया गया है।
- सरकारी फीस: आमतौर पर प्रति खतौनी ₹15 ऑनलाइन पेमेंट करना होता है (अगर आप CSC जनसेवा केंद्र से निकालते हैं, तो वे अपना ₹10-15 का सर्विस चार्ज अलग से ले सकते हैं)।
- प्रोसेसिंग का समय: अधिकांश मामलों में पेमेंट सफल होते ही खतौनी डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाती है। हालांकि तकनीकी कारणों से कुछ मामलों में थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।
Digitally Signed UP Bhulekh के नए अपडेट
- QR Code वेरिफिकेशन: इस नई खतौनी पर एक विशेष QR कोड होता है। कोई भी बैंक या सरकारी अधिकारी इसे स्कैन करके सीधे सरकारी सर्वर से इसकी असलियत की जांच (Verify) कर सकता है।
- तहसील जाने की बाध्यता खत्म: यूपी सरकार के नए नियम के अनुसार, इस डिजिटल खतौनी को हर जगह 100% स्वीकार किया जाएगा। कोई भी विभाग अब किसान से लेखपाल के हाथ के साइन या तहसील की भौतिक मुहर की मांग नहीं कर सकता।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
प्रमाणित खतौनी डाउनलोड करने की फीस कितनी है?
इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क मात्र ₹15 है।
अगर पेमेंट कट गया और PDF डाउनलोड नहीं हुई तो क्या करें?
सर्वर डाउन होने पर ऐसा हो सकता है। आप पोर्टल पर जाकर दोबारा उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करें, ‘Transaction History’ में आपको डाउनलोड का लिंक मिल जाएगा।
क्या Digitally Signed खतौनी पर लेखपाल या तहसीलदार की मुहर लगवानी पड़ेगी?
नहीं। यह डिजिटली साइन्ड कॉपी है, सरकारी नियमों के अनुसार यह बिना किसी मैन्युअल मुहर या हस्ताक्षर के पूरी तरह मान्य है।
क्या मोबाइल से निकाली गई खतौनी कोर्ट (न्यायालय) या रजिस्ट्री ऑफिस में स्वीकार की जाएगी?
हाँ, यह डिजिटल रूप से प्रमाणित प्रति भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) के तहत एक वैध सरकारी दस्तावेज है। इसे उत्तर प्रदेश के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों, दीवानी अदालतों, तहसीलों और बैंकों में पूरी तरह स्वीकार किया जाता है।
क्या हम एक ही मोबाइल नंबर से एक से अधिक जमीनों की खतौनी निकाल सकते हैं?
हाँ, आप एक ही मोबाइल नंबर से लॉगिन करके अपने परिवार के अलग-अलग सदस्यों की या अलग-अलग गांवों की खतौनी डाउनलोड कर सकते हैं। बशर्ते आपको हर खतौनी के लिए अलग से ₹15 का भुगतान करना होगा।
क्या प्रमाणित खतौनी और डिजिटल साइन खतौनी एक ही होती हैं?
हाँ, UP Bhulekh पोर्टल से डाउनलोड की गई प्रमाणित खतौनी पर डिजिटल हस्ताक्षर और QR Code होता है, इसलिए इसे डिजिटल साइन खतौनी भी कहा जाता है।
💡 एक्सपर्ट सलाह: नेहा यादव (Land Records Expert): जमीन खरीदने, बैंक लोन लेने या किसी कानूनी कार्य में खतौनी जमा करने से पहले उस पर मौजूद QR Code जरूर चेक करें। प्रमाणित खतौनी में QR Code और डिजिटल हस्ताक्षर होता है, जिसे स्कैन करके आप सीधे उसकी वैधता सत्यापित कर सकते हैं। इससे गलत या पुरानी जानकारी वाले दस्तावेज़ों पर भरोसा करने से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष: मात्र ₹15 के मामूली शुल्क में घर बैठे प्रमाणित खतौनी (Digitally Signed) डाउनलोड करने की इस व्यवस्था ने जनता को बहुत बड़ी राहत दी है। अब न तो आपको तहसील के चक्कर काटने की जरूरत है, न ही लेखपाल के पीछे भागने की और न ही दलालों को एक्स्ट्रा पैसे देने की। यह डिजिटली साइन्ड खतौनी पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें दिए गए QR कोड के कारण इसकी सत्यता पर कोई सवाल भी नहीं उठा सकता। बैंक लोन, केसीसी, कोर्ट केस या जमीन की रजिस्ट्री जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए यह कॉपी 100% मान्य है।
इसके अलावा अगर आपको जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) स्टेटस चेक करना है, तो हमारी UP Mutation Order Status Check गाइड भी देख सकते हैं।

नेहा यादव एक इंजीनियर हैं, जो जमीन (Land Records) से जुड़े कागजात और सरकारी डेटा को सरल भाषा में समझाने का काम करती हैं। अपनी तकनीकी समझ की मदद से वे जटिल जानकारी को आसान बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
Bhumi Gyan के माध्यम से उनका उद्देश्य लोगों को जमीन रिकॉर्ड, जमाबंदी, भूलेख और सरकारी भूमि प्रक्रियाओं की सही जानकारी आसान भाषा में उपलब्ध कराना है।