ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का टुकड़ा सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और सम्मान होता है। अक्सर लोग जमीन की रजिस्ट्री तो करवा लेते हैं, लेकिन ‘दाखिल-खारिज’ (Mutation) की प्रक्रिया को अधूरा छोड़ देते हैं। लेकिन कानूनी तौर पर रजिस्ट्री सिर्फ खरीद-बिक्री का एक दस्तावेज (Sale Deed) होती है। यदि आपने भी हाल ही में कोई खेत या प्लॉट खरीदा है, तो यह आर्टिकल आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
इस लेख में हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि घर बैठे मोबाइल से UP जमीन का दाखिल-खारिज स्टेटस और सरकारी आदेश (Order) कैसे चेक करें।
UP दाखिल-खारिज स्टेटस चेक करने के स्टेप्स
Step 1: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में upbhulekh.gov.in की ऑफिसियल वेबसाइट को खोलें। यह उत्तर प्रदेश सरकार का आधिकारिक भूलेख पोर्टल है।
Step 2: वेबसाइट के होमपेज पर आपको कई विकल्प दिखेंगे। यहाँ ‘खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें’ पर क्लिक करके अपने जनपद, तहसील और गांव का नाम चुन लें।

Step 3: गाँव चुनने के बाद आपके पास जमीन खोजने के विकल्प होंगे। सबसे आसान तरीका है ‘खातेदार के नाम द्वारा खोजें’। जमीन के मालिक का नाम लिखकर खोजे वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।
💡 प्रो टिप: अगर आपके पास जमीन का गाटा या खसरा नंबर नहीं है और आप केवल नाम से पूरा रिकॉर्ड खोजना चाहते हैं, तो आप इस आसान प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं: नाम से जमीन कैसे देखें UP 2026।

Step 4: अब सही खसरा और जमीन के मालिक का नाम चुनकर ‘उद्धरण देखें’ पर क्लिक करते ही आपकी जमीन की खतौनी खुलकर आ जाएगी। खतौनी में दिख रहे गाटा नम्बर पर क्लिक करें।

Step 5: आपके सामने जमीन से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं खुलकर आ जाएंगी। जमीन का दाखिल-खारिज स्टेटस चेक करने के लिए आप भूखण्ड/गाटे के वाद ग्रस्त होने की स्थिति जाने वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 6: अब आपके सामने जमीन से जुड़े सभी कोर्ट केस या दाखिल-खारिज के आवेदनों की सूची खुल जाएगी। यहाँ आपको जमीन से जुड़े सभी केस और दाखिल-खारिज आवेदन देखने को मिल जाएंगे। सूची में दिख रहे प्रतिवादी के नाम या वाद संख्या के सामने ‘विवरण देखें’ के ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 7: अब आपके सामने वाद का पूरा सारांश खुलकर आ जायेगा जिसमे दाखिल ख़ारिज की पूरी जानकारी के साथ साथ आपको जमीन की पूरी जानकारी भी दी होगी। यहाँ नीचे की तरफ दिख रहे ‘आदेश देखें’ वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

दाखिल ख़ारिज का आर्डर आपका है या नहीं ये कन्फर्म करने के लिए आप वाद/प्रतिवाद के नाम एवं पता को जरूर चेक करें।
Step 8: आदेश देखें के लिंक पर क्लिक करते ही आपको आदेश की तारीख देखने को मिल जाएगी। पूरा आदेश चेक करने के लिए आदेश देखें के पीडीऍफ़ लिंक पर क्लिक करें।

Step 9: अब आपके सामने आदेश की पूरी जानकारी विस्तार से पीडीऍफ़ के रूप में खुलकर आ जाएगी। यहाँ आपको दाखिल ख़ारिज आर्डर की तारीख और आर्डर का स्टेटस भी देखने को मिल जायेगा। साथ ही आपको वाद संख्या और अन्य जानकारी विस्तार से देखने को मिल जाएगी।

ध्यान रखे ऑनलाइन दिख रहा यह आदेश सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से होता है। इसका न्यायिक कामों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
दाखिल-खारिज (Mutation) क्या है?
आसान भाषा में कहें तो, ‘रजिस्ट्री’ वह दस्तावेज है जो यह साबित करता है कि आपने पैसे देकर जमीन खरीदी है। लेकिन ‘दाखिल-खारिज’ वह सरकारी प्रक्रिया है जिसके जरिए सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) से पुराने मालिक का नाम खारिज (हटाया) जाता है और उसकी जगह आपका नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है।
🔗 यह भी पढ़ें: यदि जमीन खरीदकर नहीं, बल्कि परिवार में किसी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार (Fauti) के रूप में मिली है, तो स्टेटस चेक करने के बजाय हमारी यह गाइड देखें: UP वरासत आवेदन कैसे करें?
दाखिल-खारिज न होने के नुकसान:
- सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में आपका नाम दर्ज न होने के कारण आप जमीन के कानूनी मालिक नहीं कहलाएंगे, जिससे भविष्य में मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है।
- खतौनी में नाम न होने से आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे।
- आप उस जमीन पर बैंक से लोन (KCC) नहीं ले पाएंगे जिस जमीन का दाखिल ख़ारिज अब तक नहीं कराया हैं।
- अगर दाखिल-खारिज नहीं हुआ, तो पुराना मालिक उसी जमीन पर दोबारा दावा कर सकता है या धोखाधड़ी करने की कोशिश कर सकता है। या फिर उस जमीन पर बड़ा लोन ले सकता हैं जिसे चुकाने की जिम्मेदारी आप पर आएगी।
- यदि आप भविष्य में उस जमीन को बेचना चाहें, तो आपके पास वैध खतौनी न होने के कारण कोई भी समझदार व्यक्ति उसे नहीं खरीदेगा और आप कानूनी रूप से जमीन ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे।
दाखिल-खारिज के सरकारी आदेश में क्या चेक करें?
जब तहसीलदार या नायब-तहसीलदार आपके दाखिल-खारिज के केस को पास कर देते हैं, तो एक सरकारी आदेश जारी होता है। इस आदेश की कॉपी हाथ में आते ही आपको सबसे पहले 4 जरुरी बातें चेक करनी चाहिए।
1. नाम खारिज (Kharij): पुराना नाम हटा या नहीं?
आसान भाषा में ‘खारिज‘ का मतलब होता है हटाना या काटना। आदेश में यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि जिस व्यक्ति से आपने जमीन खरीदी है, उसका नाम सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) से काट दिया गया है। अगर उसका नाम नहीं कटेगा, तो वह जमीन आगे भी किसी और को बेच सकता है।
2. नाम दाखिल : आपका नाम सही लिखा है या नहीं?
दाखिल या दर्ज का मतलब होता है लिखना या शामिल करना। आदेश में आपका नाम, आपके पिता या पति का नाम और आपका पता बिल्कुल सही-सही लिखा होना चाहिए। अपने नाम और पिता/पति के नाम की स्पेलिंग को अपने आधार कार्ड और बैनामे (रजिस्ट्री) के कागजों से मिलाकर देख लें। यदि नाम में एक भी अक्षर की गलती हुई, तो आगे चलकर जमीन बेचने या लोन लेने में बहुत परेशानी आएगी।
3. रकबा (Area) और खाता संख्या: जमीन का साइज सही है या नहीं?
‘रकबा’ का मतलब होता है जमीन का कुल क्षेत्रफल या साइज (जैसे हेक्टेयर या बीघे में)। आदेश में आपकी जमीन का खाता नंबर, गाटा/खसरा नंबर और कुल रकबा (जमीन का नाप) बिल्कुल वही होना चाहिए जो आपके बैनामे (रजिस्ट्री) में लिखा है। अगर आपने 1 बीघा जमीन खरीदी है, तो आदेश में भी उतना ही रकबा आपके नाम पर दर्ज होना चाहिए।
4. आदेश का स्टेटस: “स्वीकार” या “निरस्त”?
आपको यह देखना है कि कोर्ट ने आपके आवेदन को मंजूर किया है या रिजेक्ट। आदेश के सबसे आखिरी में ध्यान से देखें कि वहां “स्वीकृत” (Approved) लिखा है या नहीं। स्वीकृत लिखे होने पर ही आपका आवेदन मंजूर होगा।
यदि आदेश की कॉपी में “निरस्त” (Reject/Cancelled) लिखा हुआ है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपका दाखिल-खारिज का आवेदन किसी कारण से रद्द कर दिया गया है और जमीन अभी भी पुराने मालिक के नाम पर ही दर्ज है।
दाखिल ख़ारिज आवेदन रिजेक्ट होने पर क्या करें?
- आदेश की कॉपी में नीचे लेखपाल या तहसीलदार द्वारा रिजेक्ट करने का कारण (जैसे- कागजों की कमी, जमीन पर कोई विवाद, या गलत खसरा नंबर) लिखा होता है।
- आवेदन रिजेक्ट होने पर तुरंत अपने क्षेत्र के सरकारी लेखपाल (पटवारी) से मिलें और उनसे पूछें कि इसे कैसे सुधारा जाए।
- यदि जरूरत पड़े, तो अपनी तहसील के नायब-तहसीलदार कार्यालय में जाकर अधिकारी से मिलें और जरूरी कागज दोबारा जमा करके नए सिरे से आवेदन करें। फिर आपका आवेदन स्वीकृत कर दिया जायेगा।
दाखिल खारिज और विरासत में क्या अंतर है?
दाखिल-खारिज (Mutation): जब आप किसी दूसरे व्यक्ति से पैसे देकर जमीन खरीदते हैं और उसकी रजिस्ट्री (बैनामा) करवाते हैं, तब सरकारी कागजों में से बेचने वाले का नाम काटकर आपका नाम चढ़वाने की प्रक्रिया को ‘दाखिल-खारिज’ कहते हैं। यह काम तब किया जाता है जब जमीन का पुराना मालिक जिंदा हो और वह अपनी मर्जी से अपनी जमीन आपको बेच रहा हो या तोहफे (गिफ्ट) में दे रहा हो।
2. वरासत या फौती (Varasat): जब परिवार के किसी बुजुर्ग या जमीन के मालिक की मृत्यु (मौत) हो जाती है, तो उनकी जमीन को कानूनी रूप से उनके बच्चों, पत्नी या वारिसों के नाम पर चढ़वाने की प्रक्रिया को ‘वरासत’ या ‘फौती’ दर्ज कराना कहते हैं। इसमें कोई जमीन खरीदी या बेची नहीं जाती और न ही कोई रजिस्ट्री होती है। मालिक की मौत के बाद उनकी पुश्तैनी जमीन उनके परिवार को हक के रूप में बिना किसी पैसे के लेन-देन के मिलती है।
ग्रामीण किसानों के लिए विशेष सुझाव:
रजिस्ट्री के लगभग 35-45 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, बशर्ते किसी ने आपत्ति (Objection) न दर्ज की हो। दाखिल-खारिज के बाद अपना समय-समय पर स्टेटस चेक करते रहें ताकि अगर आपका आवेदन निरस्त हुआ हो तो आपको समय रहते वजह का पता लग जाएँ और आप गलतियों में सुधार करके फिर से आवेदन कर सकें।
💡 एक्सपर्ट सलाह: नेहा यादव (Land Records Expert): जमीन की रजिस्ट्री के बाद सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे लेखपाल के भरोसे बैठ जाते हैं। याद रखें, रजिस्ट्री के बाद अधिकतम 45 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज हो जाना चाहिए। अगर ऑनलाइन स्टेटस में ‘वाद ग्रस्त’ या आपत्ति दिखती है, तो बिना समय गंवाए अपनी तहसील के नायब-तहसीलदार कोर्ट में उपस्थित हों, ताकि कोई आपकी मेहनत की कमाई पर रोक न लगवा सके।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
रजिस्ट्री के कितने दिन बाद दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए आवेदन करना चाहिए?
रजिस्ट्री होते ही आपको तुरंत या 1-2 सप्ताह के भीतर दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन कर देना चाहिए। जितना लेट करेंगे, धोखाधड़ी का खतरा उतना ही बढ़ेगा।
क्या दाखिल-खारिज कराने के लिए कोई सरकारी फीस लगती है?
हाँ, इसके लिए एक बहुत ही मामूली सरकारी कोर्ट फीस लगती है, जिसे आप ऑनलाइन आवेदन करते समय नेट बैंकिंग या यूपीआई (UPI) से काट सकते हैं।
दाखिल-खारिज का आदेश ऑनलाइन ‘निरस्त’ दिखने पर क्या करें?
अगर ऑनलाइन स्टेटस में ‘निरस्त’ (Rejected) दिख रहा है, तो सबसे पहले आदेश की कॉपी खोलकर रिजेक्ट होने का कारण देखें। आमतौर पर गलत दस्तावेज, आपत्ति या खसरा नंबर की गलती की वजह से आवेदन निरस्त होता है। ऐसी स्थिति में अपने लेखपाल या तहसील कार्यालय से संपर्क करें और जरूरी सुधार करके दोबारा आवेदन करें।
स्टेटस चेक करने के लिए ‘वाद संख्या’ (Case Number) कहाँ से मिलती है?
जब आप रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो कंप्यूटर द्वारा एक रसीद मिलती है। उसी रसीद पर सबसे ऊपर वाद संख्या या कंप्यूटर वाद संख्या लिखी होती है।
अगर आर्डर स्टेटस ‘स्वीकृत’ दिखा रहा है, तो खतौनी में नाम कितने दिन में दिखेगा?
आदेश स्वीकृत होने के सामान्यतः 3 से 7 दिनों के भीतर कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा डेटा अपडेट कर दिया जाता है और नई खतौनी में आपका नाम दिखने लगता है।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज आर्डर स्टेटस में ‘वाद ग्रस्त’ (Case/Disputed) दिखने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि आपकी जमीन के दाखिल-खारिज पर किसी ने आपत्ति (Objection) जताई है या उस जमीन को लेकर कोई कोर्ट केस चल रहा है। ऐसी स्थिति में जब तक केस का फैसला नहीं होता, दाखिल-खारिज रुका रहेगा।
निष्कर्ष:
अगर आपने या आपके परिवार में किसी ने हाल ही में कोई जमीन खरीदी है, तो बिना लापरवाही किए आज ही ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर उसका स्टेटस चेक करें। अगर कोई गड़बड़ी या ‘निरस्त’ (Rejected) स्टेटस दिखे, तो तुरंत अपने लेखपाल या तहसील कार्यालय से संपर्क कर उसे ठीक करवाएं। थोड़ी सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई से खरीदी जमीन को भविष्य के विवादों से बचा सकती है।

नेहा यादव एक इंजीनियर हैं, जो जमीन (Land Records) से जुड़े कागजात और सरकारी डेटा को सरल भाषा में समझाने का काम करती हैं। अपनी तकनीकी समझ की मदद से वे जटिल जानकारी को आसान बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
Bhumi Gyan के माध्यम से उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के लोगों की मदद करना है, ताकि वे घर बैठे अपने खसरा, खतौनी और भूलेख के रिकॉर्ड खुद और बिना किसी गलती के देख सकें।