अगर आपके नाम पर बिहार में खेत, प्लॉट या दूसरी जमीन है, तो हर साल उसका भू-लगान (मालगुजारी) जमा करना जरूरी होता है। भू-लगान जमा करने के बाद मिलने वाली सरकारी रसीद यह प्रमाणित करती है कि संबंधित वर्ष का भूमि कर जमा हो चुका है। यह रसीद कई सरकारी और कानूनी कार्यों में महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।
इस लेख में आप जानेंगे कि भू-लगान (Land Tax) क्या होता है, इसे ऑनलाइन कैसे जमा करें, पुरानी लगान रसीद कैसे डाउनलोड करें, कई वर्षों का बकाया कैसे देखें और समय पर भू-लगान जमा करना क्यों जरूरी है।
ध्यान दें: बिहार में भू-लगान को कई जगह मालगुजारी, लगान, भूमि कर (Land Tax) या लगान रसीद के नाम से भी जाना जाता है। इस लेख में इन सभी शब्दों का अर्थ बिहार सरकार द्वारा वसूले जाने वाले वार्षिक भूमि कर से है।
घर बैठे ऑनलाइन भू-लगान (Land Tax) कैसे जमा करें?
दोस्तों इसके लिए सबसे पहले बिहार भू लगान की ऑफिशियल वेबसाइट bhulagan.bihar.gov.in पर जाएं। ध्यान रहे कि आप जमीन से जुड़े किसी भी कार्य के लिए केवल ऑफिशियल वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।

अब होम पेज पर दिख रहे ऑप्शन में से ऑनलाइन भुगतान करे (Pay Online Lagaan) वाला ऑप्शन चुने।

आपके सामने लगान भुगतान का पेज खुलकर आएगा यहां सबसे पहले अपने जिला और अंचल का नाम चुनकर आगे बढ़े वाले ऑप्शन पर क्लिक करके हल्का और मौजा का नाम भी चुन ले।
Note: नीचे दिख रहे ऑप्शंस में से किसी भी एक तरीके को चुनकर आपको अपने लगान की जानकारी निकालनी हैं। इसमें रैयत (जमीन के मालिक) के नाम से खोजे सबसे आसान तरीका होगा। इसलिए आर्टिकल में हमने रैयत के नाम से लगान भुगतान करने का तरीका बताया है।

सबसे पहले आप रैयत का नाम से खोजे वाले ऑप्शन को चुने और हिंदी में रैयत का नाम भर के, सुरक्षा कोड डालकर, खोजे के ऑप्शन पर क्लिक करें। अब नीचे दिख रही सूची में से अपने रैयत के नाम के सामने दिख रहे देखें वाले विकल्प पर क्लिक करें।
यदि ऊपर दिए गए स्टेप्स पढ़कर भी कोई बात समझ नहीं आई, तो नीचे दिया गया हमारा 👇 YouTube वीडियो देखें।
आपके सामने जमीन की पूरी जानकारी साथ ही साथ कितनी लगान की राशि बाकी है और पिछले भुगतान की जानकारी भी खुलकर आएगी। आप निजी विवरण वाले सेक्शन में अपना नाम, एड्रेस, पिन कोड, मोबाइल नंबर डालकर टर्म्स एंड कंडीशन वाले चेक बॉक्स को टिक करके ऑनलाइन भुगतान करें वाले ऑप्शन को चुने।

भू-लगान जमा करने से पहले अपनी जमीन का भू-नक्शा भी देख लें, ताकि प्लॉट नंबर, सीमाएं और जमीन की स्थिति का मिलान आसानी से किया जा सके।
आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी पेमेंट मेथड को चुनकर पेमेंट को पूरा करें। पेमेंट सफल होने के बाद बकाया राशि अपडेट होकर दिखाई देगी। कभी-कभी यह अपडेट होने में कुछ मिनट या थोड़ी अधिक देर भी लग सकती है।

अब आपको अपनी पेमेंट रसीद डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले पेमेंट की तारीख के पास दिख रहे देखें वाले ऑप्शन को चुने।

अब आप अपने इस पेमेंट रसीद को डाउनलोड करके या प्रिंट करके अपने पास सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में आप किसी भी कानूनी कार्यों या जमीनी विवाद में इसका इस्तेमाल कर सके।

यदि रसीद डाउनलोड नहीं हो रही है, तो ब्राउज़र को रिफ्रेश करें या कुछ समय बाद फिर से प्रयास करें। कई बार सर्वर व्यस्त होने के कारण PDF तुरंत उपलब्ध नहीं होती।
भू-लगान की पुरानी रशीद कैसे डाउनलोड करें?
दोस्तों इसके लिए सबसे पहले आप आर्टिकल में ऊपर बताई गई प्रक्रिया को अपना कर अपनी पंजी 2 का विवरण खोले।

पंजी 2 में आपको आपके जिला, अंचल, मौजा का नाम, साथ ही साथ जमीन के मालिक का नाम, जमीन का क्षेत्रफल इत्यादि सारी जानकारी दिखेगी। साथ ही साथ आपको पिछले भुगतान की जानकारी के लिए यहां क्लिक करे का ऑप्शन दिखेगा। इस ऑप्शन पर क्लिक करें।

यहां क्लिक करते ही आपके सामने आपके पिछले भुगतान का पूरा विवरण खुलकर आ जाएगा। यहां आपने किस तारीख को पेमेंट किया है, पेमेंट सफलतापूर्वक हुआ है या नहीं यह भी दिखेगा। विस्तार में देखने के लिए देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

देखें वाले ऑप्शन पर क्लिक करते ही आपके सामने पूरी लगान की रसीद खुलकर आ जाएगी। जहां आपका वर्तमान, बकाया, सूद, लगान इत्यादि सब कुछ विस्तार पूर्वक देखने को मिल जाएगा। आप QR कोड को स्कैन करके पूरी जानकारी ले सकते हैं और Print पर क्लिक करके आप इसे पीडीएफ के रूप में डाउनलोड करके भी रख सकते हैं।
लगान रसीद को डाउनलोड करके सुरक्षित रखें, क्योंकि भविष्य में बैंक, सरकारी कार्यालय या अन्य आवश्यक कार्यों में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।
भू-लगान या मालगुजारी (Land Tax) क्या होता है?
भू-लगान वह मामूली सालाना टैक्स या शुल्क है जो बिहार का हर रैयत (जमीन मालिक) अपनी जमीन के उपयोग के बदले राज्य सरकार को चुकाता है। उदाहरण के लिए, जैसे शहरों में मकान या दुकान होने पर नगर निगम को हर साल ‘प्रॉपर्टी टैक्स’ देना पड़ता है, ठीक उसी तरह ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में मौजूद कृषि भूमि (Agricultural Land) पर बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जो सालाना टैक्स लिया जाता है, उसे राजस्व की भाषा में ‘भू-लगान’ या ‘मालगुजारी’ कहा जाता है।
इस शुल्क को अंचल कार्यालय (Circle Office) के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा करने के बाद जो रसीद आपको मिलती है, उसे ‘लगान रसीद’ या ‘जमीन की रसीद’ कहा जाता है।
अगर आपने अभी तक अपनी जमीन की जमाबंदी नहीं देखी है, तो पहले उसे ऑनलाइन जरूर जांचें। इससे आपको सही जमाबंदी संख्या और जमीन का रिकॉर्ड आसानी से मिल जाएगा।
लगान रसीद जमीन के लिए क्यों है जरुरी?
आजकल जमीन-जायदाद के मामले में धोखाधड़ी बहुत बढ़ गई है। लोग लाखों रुपये लगाकर जमीन का बैनामा (रजिस्ट्री) तो करा लेते हैं, लेकिन उसके बाद सालों तक भूल जाते हैं और कभी सरकार को लगान नहीं चुकाते। कानून के जानकारों के मुताबिक, यह बहुत बड़ी और भारी भूल है।
अगर आप चाहते हैं कि आपकी जमीन हमेशा सुरक्षित रहे, तो लगान रसीद कटवाने के ये 4 सबसे बड़े फायदे जान लीजिए:
- सरकारी मुआवजा मिलने का मुख्य जरिया: भूमि अधिग्रहण (सड़क, हाईवे या रेलवे लाइन के लिए किसानों की जमीन लेती है) जैसी परिस्थितियों में सरकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जाती है। नियमित लगान रसीद ऐसे दस्तावेजों में से एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड हो सकती है।
- मौके पर कब्जे का पक्का सबूत: रजिस्ट्री यह दिखाती है कि आपने बीते समय में जमीन खरीदी थी, लेकिन चालू साल (नये वर्ष) की लगान रसीद यह साबित करती है कि आज की तारीख में भी जमीन पर आपका ही हक और कब्जा है। अगर कोई आपकी जमीन पर जबरन दावा करेगा, तो ऐसी परिस्थितियों में सरकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जाती है, जिनमें नियमित लगान रसीद भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकती है।
- भू-माफिया और फर्जीवाड़े से बचाव: अगर कोई धोखेबाज़ आपकी जमीन के नकली कागज़ या जाली रजिस्ट्री बनवा भी ले, तो भी वह सरकारी कंप्यूटर पर जाकर आसानी से अपने नाम की लगान रसीद नहीं कटवा सकता। जब मामला कोर्ट-कचहरी या तहसील में जाता है, तो जज पिछले कई सालों की रसीदें मांगते हैं। हर साल ईमानदारी से टैक्स भरने वाले का पक्ष अदालत में सबसे मजबूत माना जाता है।
- बैंक से लोन और केसीसी (KCC) मिलना आसान: अगर आप अपनी खेती की जमीन पर बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या कोई भी खेती-बाड़ी का लोन लेना चाहते हैं, तो बैंक आपसे खतौनी/जमाबंदी के साथ ‘नई लगान रसीद’ ज़रूर मांगेगा। बैंक यह पक्का करना चाहता है कि जिस जमीन पर लोन दिया जा रहा है, उसपर सरकार का कोई पुराना टैक्स बकाया तो नहीं है।
अगर सालों से लगान जमा नहीं किया है, तो क्या होगा?
सीधी बात यह है कि सालों से लगान न चुकाने पर सरकार आपकी जमीन छीनेगी नहीं, लेकिन आप पर ब्याज का बोझ बढ़ जाएगा और जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) रुक जाएगा। सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि सरकारी रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण भू-माफिया कर्मचारियों से मिलकर आपकी जमीन पर हेराफेरी की कोशिश कर सकते हैं।
- बकाया पर ब्याज (Interest on Arrears): सरकारी रिकॉर्ड में आपकी जमीन के आगे ‘बकाया’ (Dues) चढ़ता जाता है। जब आप कई सालों बाद इसे चुकाने जाएंगे, तो आपको मूल टैक्स के साथ एक निश्चित सालाना ब्याज (Penal Interest) भी देना होगा, जिससे रकम थोड़ी बढ़ जाएगी।
- दाखिल-खारिज (Mutation) में रुकावट: यदि आप उस जमीन को भविष्य में बेचना चाहेंगे, तो खरीदार का दाखिल-खारिज तब तक नहीं हो पाएगा जब तक कि पिछला सारा सरकारी बकाया चुकता न कर दिया जाए। बिना अपडेटेड लगान रसीद के तहसील स्तर पर म्यूटेशन की फाइल आगे नहीं बढ़ती।
- जमाबंदी पंजी और ‘पंजी-2’ (Register-II) में खाता ‘होल्ड’ या ‘संदिग्ध’ होना: बिहार राजस्व कानून के नियमों के अनुसार, यदि किसी जमीन का भू-लगान लगातार कई वर्षों तक नहीं चुकाया जाता, तो अंचल कार्यालय के मुख्य भूमि रजिस्टर यानी ‘पंजी-2’ (Register-II) में उस जमाबंदी को अस्थाई रूप से ‘होल्ड’ या ‘संदिग्ध सूची’ में डाल दिया जाता है। इसका गलत फायदा उठाकर स्थानीय भू-माफिया या जालसाज कर्मचारियों से मिलीभगत करके आपके ‘लिंक केवाला’ (पुराने मालिकाना हक के कागज़) में हेराफेरी या अवैध कब्जे की कोशिश कर सकते हैं।
💡 एक्सपर्ट सलाह: नेहा यादव (Land Records Expert): अगर आपका लगान सालों से बकाया है, तो घबराने या दलालों के चक्कर में पड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आज ही अपने राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर जाएं, वहां सिस्टम अपने आप आपके पिछले सभी वर्षों का हिसाब जोड़कर कुल रकम दिखा देगा। आप उस पूरी बकाया राशि को एक साथ ऑनलाइन जमा करके अपनी जमाबंदी को तुरंत ‘एक्टिव’ और सुरक्षित कर सकते हैं।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
क्या इंटरनेट से निकली लगान रसीद सरकारी कामों में चलती है?
ऑनलाइन काटी गई रसीद पर एक QR Code और Transaction ID होती है, जो इसे कानूनी रूप से पूरी तरह असली और मान्य बनाती है।
क्या शहरों के मकान या प्लॉट का भी लगान काटना पड़ता है?
भू-लगान सिर्फ गाँव की या खेती की जमीन पर लगता है। शहरों के मकान या प्लॉट पर नगर निगम को ‘हाउस टैक्स’ या ‘प्रॉपर्टी टैक्स’ देना होता है।
जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद लगान रसीद किसके नाम से कटेगी?
रजिस्ट्री के तुरंत बाद रसीद पुराने मालिक के नाम से ही कटेगी। जब आप तहसील से जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) करा लेंगे, तब रसीद पर आपका नाम चढ़ेगा।
ऑनलाइन लगान काटते समय पैसा कट गया पर रसीद नहीं मिली, क्या करें?
कभी-कभी सर्वर धीमा होने से ऐसा होता है। 24 से 48 घंटे इंतज़ार करें, रसीद अपने आप पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी या पैसा आपके बैंक खाते में वापस आ जाएगा।
क्या एक ही लगान रसीद पर कई लोगों के नाम हो सकते हैं?
हाँ, अगर जमीन पुश्तैनी है और भाइयों या परिवार के बीच अभी तक सरकारी तौर पर बंटवारा नहीं हुआ है, तो रसीद पर सभी हिस्सेदारों के नाम एक साथ लिखे होते हैं।
क्या एक साथ कई वर्षों का बकाया भू-लगान जमा किया जा सकता है?
हाँ, कई मामलों में ऑनलाइन पोर्टल पुराने बकाया वर्षों की कुल राशि दिखाता है। भुगतान से पहले पोर्टल पर दिखाई गई जानकारी का मिलान अवश्य करें।
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निष्कर्ष (Conclusion): भू-लगान समय पर जमा करना केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि अपनी जमीन का सरकारी रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट रखने का भी महत्वपूर्ण तरीका है।
- ✔ इस लेख में बताई गई पूरी प्रक्रिया आधिकारिक Bihar Bhulagan Portal पर स्वयं जांची और सत्यापित की गई है।
- ✔ लेख में उपयोग किए गए सभी स्क्रीनशॉट BhumiGyan टीम द्वारा आधिकारिक वेबसाइट से स्वयं तैयार किए गए हैं।
- ✔ इस गाइड में ऑनलाइन भू-लगान भुगतान, पुरानी लगान रसीद डाउनलोड, रैयत के नाम से खोज, पंजी-2 (Register-II), बकाया लगान और भुगतान रसीद सहित आम नागरिकों द्वारा सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्रमुख आधिकारिक विकल्पों की जानकारी शामिल की गई है।
- ✔ जानकारी बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Revenue & Land Reforms Department, Government of Bihar) द्वारा संचालित आधिकारिक Bihar Bhulagan Portal और उपलब्ध सरकारी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
- ✔ इस लेख की जानकारी अंतिम बार सत्यापित की गई: 20 जून 2026
- ✔ यदि भविष्य में बिहार सरकार द्वारा भू-लगान (मालगुजारी), ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया, रसीद डाउनलोड या पोर्टल के विकल्पों में कोई बदलाव किया जाता है, तो इस लेख को उसी के अनुसार अपडेट किया जाएगा।
📌 आधिकारिक स्रोत
इस लेख में दी गई जानकारी बिहार सरकार के Revenue & Land Reforms Department, Government of Bihar द्वारा संचालित आधिकारिक Bihar Bhulagan Portal तथा उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है.
https://www.bhulagan.bihar.gov.in/

नेहा यादव BhumiGyan में Research Lead एवं Author हैं। वे भारतीय भूमि रिकॉर्ड, भूलेख पोर्टल, जमाबंदी, खतौनी, रजिस्ट्री और म्यूटेशन जैसी सरकारी प्रक्रियाओं पर शोध आधारित हिंदी गाइड तैयार करती हैं।
उनका उद्देश्य जटिल भूमि संबंधी जानकारी को सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक सही जानकारी के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकें।