क्या आपको पता है कि आपके गांव की कौन सी जमीन सरकारी है और कौन सी प्राइवेट? कई बार लोग यह समझ नहीं पाते कि कोई जमीन खेती की है, बंजर है या तालाब/सरकारी श्रेणी में दर्ज है। अच्छी बात यह है कि अब आप UP Bhulekh Portal की मदद से घर बैठे मोबाइल से यह जानकारी देख सकते हैं।
नीचे हम स्टेप-बाय-स्टेप समझेंगे कि जमीन के प्रकार से रिकॉर्ड कैसे देखें और भूलेख में दिखने वाले 1-क, 5-1, 5-3 जैसे कोड का क्या मतलब होता है, ताकि आप जमीन की सही पहचान कर सकें और धोखाधड़ी से बच सकें।
| महत्वपूर्ण जानकारी (Key Details) | विवरण (Information) |
|---|---|
| आधिकारिक पोर्टल (Official Website) | upbhulekh.gov.in |
| लेख का विषय (Article Topic) | UP Bhulekh जमीन के प्रकार से जमीन देखें |
| सर्च का तरीका (Search Method) | जमीन के प्रकार द्वारा (By Land Type) |
| फायदा | यह पता करना कि जमीन सरकारी है या प्राइवेट |
| सेवा शुल्क (Service Fee) | निःशुल्क (Free of Cost) |
| आवश्यक दस्तावेज | जिला, तहसील, ग्राम का नाम और जमीन प्रकार |
जमीन के प्रकार से जमीन कैसे देखें (Step-by-Step प्रक्रिया)
Step 1: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर में (upbhulekh.gov.in) UP Bhulekh की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
Step 2: अब होम पेज पर “खतौनी की नकल देखें” का ऑप्शन दिखेगा। जमीन के प्रकार से जमीन देखने के लिए इस ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 3: अब अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी जैसे कि अपने जनपद, तहसील और गांव का नाम सही से चुनें। यह जानकारी ध्यान से भरें, क्योंकि यहां गलती होने पर गलत रिकॉर्ड खुल सकता है।

Step 4: अब स्क्रीन पर दिख रहे “भूमि श्रेणी द्वारा खोजें” वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।
अगर आप जमीन का रिकॉर्ड नाम के आधार पर देखना चाहते हैं, तो 👉 नाम से जमीन कैसे देखें की पूरी प्रक्रिया यहां समझें।

Step 5: स्क्रीन पर खुलकर आए डिजिटल कीबोर्ड की मदद से अपनी जमीन का प्रकार दर्ज करें और खोजें के ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 6: अब नए पेज पर नीचे की ओर दिख रहे सूची में से अपनी जमीन का प्रकार सही से चेक कर लें। यहाँ आपको अलग-अलग भूमि श्रेणियों की पूरी सूची दिखाई देगी।

Step 7: आपके सामने उस प्रकार की सभी जमीनों की सूची आ जाएगी। आप उस सूची में से अपनी जमीन के सामने दिख रहे चेकबॉक्स पर क्लिक करें। अब ऊपर दिख रहे “उद्धरण देखें” वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 8: आपकी जमीन की पूरी खतौनी स्क्रीन पर खुल जाएगी। अगर आप इसे पीडीएफ के रूप में डाउनलोड करना चाहते हैं, तो Download PDF के ऑप्शन पर क्लिक करें।

Step 9: आपके सामने जमीन का पूरा विवरण जैसे कि जमीन के मालिक का नाम, जमीन का क्षेत्रफल और अन्य विवरण दिखाई देंगे। इस तरह आप भूमि प्रकार के आधार पर अपनी जमीन का पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं।

यूपी भूलेख भूमि प्रकार (Land Category) की पूरी लिस्ट और अर्थ
जब आप UP Bhulekh पोर्टल पर खतौनी देखते हैं, तो वहां ‘भूमि श्रेणी’ के कॉलम में कुछ खास कोड (जैसे 1-क, 5-1 या 6-1) लिखे होते हैं। ये कोड बताते हैं कि वह जमीन खेती की है, सरकारी है या किसी सार्वजनिक उपयोग (जैसे तालाब या रास्ता) के लिए है। नीचे दी गई टेबल में हमने आधिकारिक रिकॉर्ड के सभी 25 भूमि प्रकारों का आसान मतलब समझाया है, ताकि आप अपनी जमीन की सही पहचान कर सकें।
| श्रेणी | भूमि प्रकार का आसान मतलब (Simple Hindi) |
|---|---|
| 1 | ग्राम समाज या सरकार के अधिकार वाली खेती की जमीन। |
| 1-क | सुरक्षित निजी खेती की जमीन (इसे बेच सकते हैं)। |
| 1-क(क) | रिक्त या खाली जमीन। |
| 1-ख | गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत व्यक्तियों के पास मौजूद जमीन। |
| 2 | असंक्रमणीय भूमिधर (पट्टे वाली जमीन, बेचना प्रतिबंधित)। |
| 3 | असामियों (Tenants) के अधिकार वाली जमीन। |
| 4 | बिना पुराने रिकॉर्ड के कब्जे वाली जमीन। |
| 4-क | सीलिंग कानून के तहत सरकार द्वारा अधिग्रहित अतिरिक्त जमीन। |
| 4-क(ख) | अन्य प्रकार की सरकारी या अधिग्रहित भूमि। |
| 5-1 | खेती योग्य नई परती (हाल ही में खाली पड़ी जमीन)। |
| 5-2 | खेती योग्य पुरानी परती (सालों से खाली पड़ी जमीन)। |
| 5-3-क | बंजर जमीन – जहाँ इमारती लकड़ी के वन या पेड़ हों। |
| 5-3-ख | बंजर जमीन – जहाँ झाड़ियाँ और अन्य वृक्ष हों। |
| 5-3-ग | चारागाह: पशुओं के चरने की आरक्षित सरकारी जमीन। |
| 5-3-घ | छप्पर छाने की घास और बाँस की कोठियों वाली जमीन। |
| 5-3-ङ | अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। |
| 5-क(क) | वन भूमि: आदिवासियों को खेती हेतु दिए गए अधिकार। |
| 5-क(ख) | वन भूमि: आबादी (रहने) हेतु दिए गए अधिकार। |
| 5-क(ग) | वन भूमि: सामुदायिक वनाधिकार हेतु जमीन। |
| 6-1 | जलमग्न भूमि: तालाब, पोखर, झील या नदी। |
| 6-2 | अकृषिक भूमि: सड़क, रेलवे, भवन और सरकारी निर्माण। |
| 6-3 | कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) के लिए आरक्षित जमीन। |
| 6-4 | अन्य कारणों से खेती के अयोग्य (अकृषित) जमीन। |
| 7 | असामियों के अधिकार वाली अन्य भूमि। |
| 9 | बिना सहमति के कब्जे वाली जमीन (अवैध कब्जा)। |
ऊपर दी गई सूची उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद (Revenue Board) के आधिकारिक रिकॉर्ड और नियमों पर आधारित है। हालांकि हमने इसे आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन किसी भी कानूनी कार्यवाही या जमीन की खरीद-बिक्री से पहले आधिकारिक तहसील रिकॉर्ड और सरकारी पोर्टल (upbhulekh.gov.in) से जानकारी का मिलान अवश्य करें। यह जानकारी केवल आपकी सहायता और जागरूकता के लिए है।
1. कृषि योग्य भूमि (Agricultural Land)
ऐसी जमीन खेती के काम आती है और आमतौर पर कृषि योग्य मानी जाती है।
- श्रेणी 1-क: ऐसी भूमि जो सुरक्षित है और जिस पर खातेदारों (किसानों) का पूरा भूमिधर अधिकार है। यानी यह आपकी निजी खेती की जमीन है जिसे आप बेच भी सकते हैं।
- श्रेणी 1-ख: ऐसी भूमि जिस पर खातेदारों का पूरा भूमिधर अधिकार नहीं है। इसे आप जोत तो सकते हैं लेकिन बिना सरकारी अनुमति के बेच नहीं सकते।
2. अकृषिक भूमि (Non-Agricultural Land)
यह वह जमीन है जिस पर खेती नहीं होती और जो अन्य कार्यों के लिए उपयोग की जाती है। ऐसी जमीन पर खेती नहीं की जा सकती है।
- श्रेणी 2: यह जमीन अक्सर बस्तियों, सड़क या अन्य निर्माण कार्यों के लिए होती है। इसमें आबादी वाली जमीन भी शामिल हो सकती है।
3. सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि
गांव की इस श्रेणी की जमीन पर किसी व्यक्ति का निजी अधिकार नहीं होता। यह गांव की जमीन होती है।
- श्रेणी 5-1 (ऊसर): वह जमीन जो उपजाऊ नहीं है और सरकारी रिकॉर्ड में अनुपजाऊ भूमि के रूप में दर्ज है।
- श्रेणी 5-2 (बंजर): यह खेती के अयोग्य जमीन है। जिसे बंजर माना जाता है लेकिन ऐसी जमीन को देखरेख से कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
- श्रेणी 5-3 (जलमग्न): ऐसी जमीन जो जल स्रोतों के नीचे है (जैसे पुराने छोटे पोखर)। यह आमतौर पर उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ मिट्टी का नमूना पूरी तरह से पानी के नीचे (पूर्ण संतृप्त) होता है।
- तालाब/पोखर: गांव के सार्वजनिक तालाब या पोखर इसके अंतर्गत आते है। इस जमीन पर किसी का निजी मालिकाना हक नहीं होता।
- चारागाह: वह जमीन जो पशुओं के चरने के लिए आरक्षित रखी गई है। जिस पर घास लगी हो और जो पशुओं के चरने के काम आती है।
- कब्रिस्तान/श्मशान: यह शवों के अंतिम संस्कार के लिए आरक्षित भूमि है एवं इस जमीन पर भी किसी का मालिकाना हक़ नहीं होता।
4. अन्य महत्वपूर्ण जमीन के प्रकार
- चकमार्ग (Chakmarg): खेतों के बीच से गुजरने वाले कच्चे या पक्के रास्ते को चकमार्ग कहते है।
- खलिहान: फसल कटाई के बाद अनाज रखने या सुखाने के लिए गांव की साझा जमीन को खलिहान कहते है।
- खाद के गड्ढे: गांव का वह हिस्सा जो कूड़ा या खाद डालने के लिए सुरक्षित होता है।
- बाग: वह जमीन जिस पर पुराने पेड़ या फलदार वृक्ष लगे हों और वह सरकारी रिकॉर्ड में बाग दर्ज हो।
जमीन खरीदते समय क्या देखना जरूरी है?
जब आप Bhulekh UP वेबसाइट पर जाते हैं, तो दाईं ओर दी गई लिस्ट में से सही शब्द का चुनाव करें।
- यदि आप निजी जमीन ढूंढ रहे हैं, तो हमेशा श्रेणी 1-क को चुनें।
- यदि आप यह देखना चाहते हैं कि गांव में कितनी सरकारी जमीन है, तो बंजर, ऊसर या तालाब वाली श्रेणियों को चुनें।
- यदि जमीन श्रेणी 2, 3 या 5 के अंतर्गत आती है, तो वह सरकारी या पट्टे की हो सकती है। ऐसी जमीन की रजिस्ट्री कानूनी रूप से मान्य नहीं होती और आपके पैसे डूब सकते हैं।
- अगर आप उत्तर प्रदेश में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो हमेशा भूलेख पोर्टल पर जमीन के प्रकार जरूर चेक करें।
Note: कई बार एक ही खसरे में एक से अधिक जमीन के प्रकार हो सकते हैं। यदि आप किसी जमीन को खरीदने की सोच रहे हैं, तो उसकी ‘भूमि श्रेणी’ जरूर चेक करें ताकि आप गलती से सरकारी या चकमार्ग की जमीन न खरीद लें।
💡 BhumiGyan Expert Note (नेहा यादव):
“ज़मीन के सौदों में सबसे बड़ी धोखाधड़ी सरकारी ज़मीन को निजी बताकर बेचने में होती है। कई बार भू-माफिया चकमार्ग (रास्ता) या चारागाह की ज़मीन पर कब्ज़ा करके उसे भोली-भाली जनता को बेच देते हैं। रजिस्ट्री ऑफिस में कागज़ बन जाते हैं, लेकिन म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के समय सरकारी ज़मीन होने के कारण आपका नाम नहीं चढ़ता। इसलिए, पैसा देने से पहले हमेशा UP Bhulekh पर भूमि श्रेणी 6-1 (तालाब) या 6-2 (आबादी/सड़क) को ज़रूर चेक कर लें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!”
गांव की सरकारी जमीन की पहचान कैसे करें?
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि आपके गांव में कितनी जमीन सरकारी (ग्राम सभा) की है, तो लिस्ट में नीचे की श्रेणियों को देखें:
- श्रेणी 5-3-क/ख: इसमें बंजर, झाड़ियाँ और जंगल वाली जमीन आती है।
- श्रेणी 1: इसमें वह जमीन आती है जिसका प्रबंधन सीधे ग्राम सभा या स्थानीय अधिकारियों के हाथ में होता है।
टिप: अपने लेख में जरूर लिखें कि अगर कोई जमीन खरीद रहा है, तो उसे हमेशा श्रेणी 1-क ही देखनी चाहिए। अगर जमीन श्रेणी 2 या श्रेणी 3 में है, तो उसे खरीदने में कानूनी अड़चन आ सकती है।
सरकारी जमीन की पहचान: यदि कोई यह जानना चाहता है कि गांव की बंजर या चराई वाली जमीन कहाँ है, तो उसे श्रेणी 5-1 से 5-3 तक चेक करना चाहिए।
जरूरी बातें ध्यान में रखें
- ऑनलाइन प्राप्त यह विवरण केवल आपकी जानकारी के लिए है। इसे आप किसी अदालती मामले में सीधे इस्तेमाल नहीं कर सकते, उसके लिए प्रमाणित प्रति जरूरी है।
- इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप गांव की सार्वजनिक संपत्तियों जैसे चारागाह, कब्रिस्तान, या खेल के मैदान की जमीन का विवरण देख सकते हैं।
- हमेशा केवल सरकारी वेबसाइट का ही प्रयोग करें। किसी भी निजी ऐप पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
सरकारी जमीन और भूमि श्रेणी से जुड़े कुछ खास सवाल
अक्सर लोग हमसे पूछते हैं कि Sarkari jamin ki list kaise nikale? इसका सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपने गांव को चुनकर ‘भूमि श्रेणी’ वाले विकल्प में जाएं और वहां श्रेणी 5 या 6 को सिलेक्ट करें। इससे आपको पूरे गांव की सरकारी जमीन का विवरण मिल जाएगा।
वहीं अगर आप Gata sankhya se jamin ka prakar जानना चाहते हैं, तो खतौनी डाउनलोड करने के बाद सबसे ऊपर ‘भूमि श्रेणी’ का कॉलम देखें। वहां लिखे कोड (जैसे 1-क) से आपको जमीन की असलियत पता चल जाएगी।
अगर आपके पास गाटा/खसरा नंबर है, तो 👉 खसरा नंबर से जमीन कैसे देखें इसकी प्रक्रिया यहां देखें।
बहुत से लोग Gram Samaj ki jamin ka vivran देखना चाहते हैं ताकि वे गांव के विकास कार्यों या पट्टे की जानकारी ले सकें। UP Bhulekh पर श्रेणी 5-3 (खलिहान, तालाब) और श्रेणी 6 (बंजर, आबादी) को देखकर आप आसानी से ग्राम समाज की सुरक्षित जमीन की पहचान कर सकते हैं।
क्या भूमि श्रेणी से सरकारी जमीन पता चल सकती है?
हाँ, कुछ भूमि श्रेणियां सरकारी या ग्राम समाज की जमीन को दर्शाती हैं।
क्या जमीन का प्रकार देखकर मालिक का नाम पता चलता है?
हाँ, रिकॉर्ड खोलने पर मालिक का नाम और अन्य विवरण दिखाई देते हैं।
क्या मोबाइल से भूमि श्रेणी द्वारा रिकॉर्ड देखा जा सकता है?
हाँ, आप मोबाइल से भी UP Bhulekh Portal का उपयोग कर सकते हैं।
निष्कर्ष
अब आप आसानी से समझ गए होंगे कि UP Bhulekh में भूमि श्रेणी देखकर जमीन का प्रकार कैसे पहचाना जाता है। सही भूमि श्रेणी जानने से आप निजी, सरकारी, बंजर या तालाब जैसी जमीन की पहचान कर सकते हैं और जमीन खरीदते समय गलत निर्णय लेने से बच सकते हैं।

नेहा यादव एक इंजीनियर हैं, जो जमीन (Land Records) से जुड़े कागजात और सरकारी डेटा को सरल भाषा में समझाने का काम करती हैं। अपनी तकनीकी समझ की मदद से वे जटिल जानकारी को आसान बनाती हैं, ताकि हर कोई उसे आसानी से समझ सके।
Bhumi Gyan के माध्यम से उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के लोगों की मदद करना है, ताकि वे घर बैठे अपने खसरा, खतौनी और भूलेख के रिकॉर्ड खुद और बिना किसी गलती के देख सकें।